26 C
New York
Tuesday, July 16, 2024

Buy now

हिंदू मंदिरों के दान में आये सोने के आभूषण पिघलाएगी तमिलनाडु की स्टालिन सरकार

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सरकार राज्य के मंदिरों का सोना पिघलाने की योजना लेकर आई है। इन्हें पिघला कर 24 कैरेट के गोल्ड बार्स बनाए जाएँगे। राज्य सरकार का कहना है कि ये वो सोना है, जो मंदिरों के नि यंत्रण में है और जिनका उपयोग नहीं हो पा रहा। सबसे पहले तिरुवरकाडु के श्री कुमारीअम्मन मंदिर, समयपुरम के मरियम्मन मंदिर और ईरुक्कनकुडी के मरियम्मन मंदिर पर सरकार की नजर है।

तमिलनाडु की सरकार ने कहा है कि सोना को पिघलाकर बिस्किट बनाए जाने के बाद उन्हें राष्ट्रीय बैंकों में डिपॉजिट किया जाएगा और उससे जो रुपए आएँगे, उसका इ स्तेमाल ‘स्टेट हिन्दू चैरिटेबल एंड रिलीजियस एंडोमेंट्स (HR & CE)’ विभाग द्वारा मंदिरों के विकास में किया जाएगा। मुख्यमंत्री स्टालिन ने बुधवार (13 अक्टूबर, 2021) को ये योजना लॉन्च की। सरकार का कहना है कि वो श्रद्धालुओं द्वारा दान में दिए गए सिर्फ उन्हीं सोने के आभूषणों को पिघलाएगी, जिनका पिछले 10 वर्षों से इ स्तेमाल नहीं हुआ है।

Also Read : तमिलनाडु में BJP का बढ़ता बर्चस्व देख तिलमिला उठा “चिदंबरम” ने सनातन धर्म को विषैला बता दिया

सोने को ‘मोनेटाइज’ करने की योजना 1979 में ही आ गई

सरकार ने कहा है कि मंदिरों के सोने को ‘मोनेटाइज’ करने की योजना 1979 में ही आ गई थी। बताया गया है कि इसके तहत 9 प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दान में दिए जाने वाले सोने को पिघलाया जाता है, जिनमें मदुरै का प्राचीन मीनाक्षी सुन्दरीश्वर मंदिर, पलानी का धनदायुथपानी मंदिर, तिरुचेंदूर का श्री सुब्रमण्य स्वामी मंदिर और समापुरम का मरियम्मम मंदिर शामिल है। स्टालिन सरकार ने कहा है कि ये योजना नई नहीं है।

सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान कहा कि पिछले 44 वर्षों से ये योजना चली आ रही है। अब तक मंदिरों में रखे 500 किलो सोने को पिघला कर बैंकों में डिपॉजिट किया गया है और इससे राज्य सरकार को ब्याज के रूप में 11 करोड़ रुपए की कमाई हुई है। सरकार ने अब 2137 किलो सोने को पिघलाने का फै सला लिया है। इसके खिला फ अदालत में याचिकाएँ दाखिल हुई हैं और कहा गया है कि ये प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है।

एक याचिका में कहा गया है कि तमिलनाडु की तथाकथित सेक्यु लर सरकार राज्य के 38,000 मंदिरों में रखे गए 2000 किलो से भी अधिक सोने को पिघलाएगी, जिसका मूल्य 10,000 करोड़ रुपए से भी अधिक है। यचिकाओं में कहा गया है कि ये आभूषण मंदिरों के हैं और भक्तों ने इन्हें दान में दिया है, इसीलिए सरकार को इन्हें छूने का कोई हक़ नहीं है। सवाल है कि जब 60 वर्षों से कोई रजिस्टर ही मेंटेन नहीं किया जा रहा तो पता कैसे चलेगा कौन से आभूषणों का उपयोग नहीं हो पा रहा और कौन से 10 वर्ष पुराने हैं?

Related Articles

Stay Connected

51,400FansLike
1,391FollowersFollow
23,100SubscribersSubscribe

Latest Articles