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Monday, June 17, 2024

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हिंदुस्तान को अंधेरे में डूबा रही ‘मुफ्त की बिजली’ वाली पॉलिसी..

राजनीति में बादलाव की बात करते हुए अरविंद केजरीवाल ने राजनीति में कदम रखा। महंगाई से पस्त जनता को मुफ़्त की बिजली और मुफ़्त पानी देने का वादा कर दिल्ली की सत्ता हासिल कर ली। उनके वादे के मुताबिक दिल्ली की जनता को मुफ़्त की बिजली और मुफ़्त पानी मिलने लगा। मगर इस फ्री बिजली और फ्री पानी की असल कीमत दिल्ली के आस-पास के राज्य उठा रहे है। कोई ये नहीं चाहेगा कि देश की राजधानी अंधेरे में डूबी रहे। इसलिए अलग-बगल के राज्यों की बिजली सप्लाई को कम करके दिल्ली को दी जाती है। मुफ्त बिजली का लाभ ले रही दिल्ली की जनता इस बात से बेखबर  बिजली का इस्तेमाल कर रही है। आज हम आपको बताएंगे कि कैसे ‘मुफ्त की बिजली’ वाली पॉलिसी हिंदुस्तान को अंधेरे की तरफ ले जा रही है।

मुफ्त का कुछ नहीं होता तो ‘बिजली कैसे मुफ्त’

सबको ‘मुफ्त की बिजली’ देने के लिए सरकार को भारी बोझ उठाना पड़ता है। मगर वोटबैंक के लिए सरकार ये कदम उठाती है। दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। मुफ्त बिजली की भरपाई सरकार अन्य माध्यमों से करती है। जैसे जनता के ऊपर कोई नया टैक्स लगाना, क र्ज़ लेना या फिर किसी जरूरी सेवा के बजट में कमी करना। चुनाव में हा र जाने के बाद इसका बोझ नई सरकार के सिर पर आता है। इसके कारण अच्छी बिजली सप्लाई के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित नहीं हो पाता है।

चुनाव जीतने के लिए ‘मुफ्त की बिजली’ का सहारा

दिल्ली में मुफ्त बिजली देकर दिल्ली की सत्ता पर बैठे अरविंद केजरीवाल अब पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में अपनी पार्टी को विस्तार देने में लगे है। इन सभी राज्यों में वह दिल्ली की तरह मुफ्त बिजली देने का वादा कर रहे है। उनको देखते हुए अन्य पार्टियां भी अपने -अपने यहां फ्री बिजली का वादा कर रही है। अब सवाल है कि जब सभी फ्री में बिजली देंगे तो इसका बोझ कौन उठाएगा। इसका बोझ बिजली कंपनियों पर और आम जनता पर आएगा। प्राइवेट बिजली कंपनी भारत में अपना काम बं द कर देगी। ऊर्जा क्षेत्र में विदेशी निवेश नहीं होगा। सरकार तमाम कल्याणकारी योजनाओं के बजट में कमी करेगी। बिजली सप्लाई के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं विकसित होगा। मुफ्त की बिजली के कारण कुछ ही सालों में हिंदुस्तान अं धकार में डूब जाएगा।

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मुफ्त बिजली की असली कीमत पर्यावरण

बिजली उत्पन्न करने के भारत में दो माध्यम है। पहला कोयले से बिजली बनाना और दूसरा बांध से बिजली बनाना। कोयले से बिजली बनाने की कीमत वायु प्र दूषण और बांध से बिजली बनाने की कीमत हजारों एकड़ भूमि का पानी में डूबना, जीव-जंतुओं की कमी और लाखों लोगों का वि स्थापन। इतनी भारी कीमत चु काने के बाद बिजली आती है। जिसे अरविंद केजरीवाल जैसे नेता वोटबैंक के लिए मुफ्त में दे रहे है। ऐसा ही चलता रहा तो बहुत जल्द हिंदुस्तान अंधरे में डूब जाएगा

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