जानें कैसे कृषि कानून वापस लेकर मोदी सरकार ने पाकिस्तान- खालिस्तानियों के इरादों पर फेर दिया पानी !

केंद्र में जारी नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की सरकार ने 3 नए कृषि कानूनों (Farm Bills) को लेकर बीते कल एक जानकारी दी है। जानकारी के अनुसार इस महीने के आखिरी सप्ताह में होने वाले संसद सत्र में तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाएगा। सरकार द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के निर्णय के बाद ही अब खालिस्तानी (Khalistan) और पाकिस्तानी सोच रखने वाले लोगों को बहुत नुक सान हो सकता है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर किसानों और कृषि कानूनों से इस तरह की सोच का क्या लेना देना? इस खबर के माध्यम से हम आपको पूरी जानकारी देने वाले हैं। आइए आपको पूरी खबर विस्तार से बताते हैं।

खालिस्तानी सोच पर फिरा पानी

आपको बता दें कि खालिस्तानी (Khalistan) समर्थक ज्यादातर कनाडा (Canada) में रहते हैं। खालिस्तान का समर्थन करने वाले लोग दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों को फंड कर रहे थे। इस तरह की जानकारी हमें कई मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से मिलती है। किसान किसी भी तरह तीनों कृषि कानून को वापस करवाना चाहते थे। उन्हें फंड की बहुत ही ज्यादा जरूरत थी। इसलिए उन्होंने खालिस्तानी द्वारा मिल रहे फंड का स्वागत किया था। अगर खालिस्तान समर्थक आज उन्हें फंड कर रहे थे। यह भी संभव है कि कभी न कभी वह लोग भी किसानों से कुछ मां ग करते ही।

भारत सरकार ने माना सीमा पर बैठे किसान राष्ट्र की सु रक्षा में डाल रहे थे बाधा

प्रवासी भारतीय समुदाय और भारत की सु रक्षा एजेंसियों ने इस बात की जानकारी दी है कि किसानों के बीच में कई ऐसे लोग भी मौजूद थे। जिनका किसानों से कोई लेना-देना नहीं था। सिर्फ इतना ही नहीं वे लोग किसानों से कुछ ऐसा भी काम करवा सकते थे। जो शायद हमारे देश के लिए सही नहीं हो। जैसा कि आपको पता है कि किसानों को लेकर भारत के साथ ही साथ कई अन्य देशों के लोग ट्वीट कर रहे थे। टूल किट के बारे में भी सरकार को जानकारी मिली थी।

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सिख फॉर जस्टिस (SFJ) भी कर रहे थे समर्थन

आपको बता दें कि किसानों के समर्थन में सिख फॉर जस्टिस भी उतर आए थे। सिख फॉर जस्टिस को लेकर कई तरह की बातें कही जाती है। कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि सिख फॉर जस्टिस एक समूह है। जो पंजाब के लोगों के लिए काम करते हैं। आपको बताते चलें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय लेने के बाद ही खालिस्तानी और पाकिस्तान के लोग खुश नजर नहीं आ रहे हैं। क्योंकि वह लोग लगातार किसानों को समर्थन कर रहे थे।