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Friday, June 21, 2024

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आजम खान के जौहर विश्वविद्यालय को लेकर यूपी सरकार ने लिया अहम निर्णय……

रामपुर जिला प्रशासन ने कल जौहर विश्वविद्यालय से 70 हेक्टेयर से अधिक भूमि को वापस ले लिया  है। तहसीलदार प्रमोद कुमार ने कहा, “उच्च न्यायालय ने आज़म खान की याचिका को मानाने से मना कर दिया है। इन दिनों आज़म खान हवालात की हवा खा रहे है। आइये आपको पूरी खबर विस्तार से बताते है।

आज़म खान के ट्रस्ट ने सरकारी श र्तों का नहीं किया पालन

जिलाधिकारी रवींद्र कुमार मांदड़ ने बुधवार को बताया था कि अदालत के पिछले सोमवार के निर्णय का अध्ययन किया जा रहा है। उसी के अनुसार इस मामले की जाँ च की जाएगी। उन्होंने बताया कि अपर जिलाधिकारी (प्र शासन) की अदालत ने गत 16 जनवरी को जौहर ट्रस्ट की 70.005 हेक्टेयर जमीन, उसे देने के लिए लगाई गई श र्तें पूरी नहीं करने पर सरकार में निहित करने का आदेश दिया था। उन्होंने बताया कि उसके बाद ही जौहर विवि की जमीन को सरकार में निहित कर लिया गया था। अब उच्च न्यायालय के निर्णय का अध्ययन किया जा रहा है।

जौहर ट्रस्ट को वर्ष 2005 में कुछ नियमों पर इस विश्वविद्यालय को बनाने के लिए जमीन दी गई थी। नियमों का पालन नहीं करने के कारण ट्रस्ट से जमीन वापस ले ली गई है। रामपुर से सपा सांसद आजम खान इस ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं, जबकि उनकी पत्नी डॉक्टर तजीन फातिमा ट्रस्ट की सचिव और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खां इस ट्रस्ट के सद स्य हैं।

जौहर ट्रस्ट के आजीवन कुलाधिपति है आज़म खां

उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद जमीन को क़ानूनी रूप से सरकार ने ले लिया है। आपको बता दें कि आज़म खान,  जौहर विश्वविद्यालय के आजीवन कुलाधिपति है। जिला प्रशासन के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने जौहर विवि की जमीन को लेकर शि कायतें की थीं। सूत्रों के अनुसार जां च की गई तो पता चला कि जौहर ट्रस्ट के नाम पर 2005 से लेकर अब तक 75.0563 हेक्टेयर जमीन खरीदी गई थी। सूत्रों के अनुसार मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार की कैबिनेट के फैसले में जौहर ट्रस्ट द्वारा खरीदने वाली जमीन पर शु ल्क से छूट दी थी।

लोकहित कार्यों की आड़ में खोला गया था जौहर विश्वविद्यालय

सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट के नाम पर जो 70.005 हेक्टेयर जमीन खरीदी गई उसके लिए स्टांप शु ल्क का भुगतान नहीं किया गया। कैबिनेट से जो प्रस्ताव पारित हुआ था। उसमें नियम था कि ट्रस्ट की ओर से लोकहित से जुड़े कार्य कराने होंगे और अ ल्पसं ख्यकों और गरीबों को नि:शुल्क शिक्षा देनी होगी लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

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