कृषि कानून वापसी के बाद अब अकाली दल भाजपा आएंगे साथ ! सुखबीर सिंह बादल ने कही ये बात..

PM नरेंद्र मोदी बीते कल यानी 19 नवंबर को राष्ट्र को संबोधित कर रहे थे। राष्ट्र के संबोधन में उन्होंने किसानों (Farmers) को लेकर एक ऐसी बात कही है। जिससे सभी किसान खुश नजर आ रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस (Congress) तथा अन्य पार्टी के नेता इसे अपनी जीत बता रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ बीते विधानसभा चुनाव में उतरी थी। कृषि कानून के कारण शिरोमणि अकाली दल ने भारतीय जनता पार्टी से अपना समर्थन वापस ले लिया था। कृषि कानून की वापसी पर शिरोमणि अकाली दल ने क्या कुछ कहा है। आइए आपको पूरी खबर विस्तार से बताते हैं।

कृषि कानून की वजह से लिया था समर्थन वापस

आपको बता दें कि किसी कानून की वजह से शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) से अपना समर्थन वापस ले लिया था। शिरोमणि अकाली दल द्वारा भारतीय जनता पार्टी से समर्थन वापस लेने के बाद पंजाब (Punjab) में बीजेपी अकेली पड़ गई थी। कुछ लोग यह भी कयास लगा रहे हैं कि शिरोमणि अकाली दल जल्दी ही भारतीय जनता पार्टी के साथ चुनाव में उतरने की तैयारी कर सकते हैं। लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है शिरोमणि अकाली दल के नेता ने बताया है।

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने क्या कहा

शिरोमणि अकाली दल के नेता और अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल (Sukhbir Singh Badal) ने तीनों कृषि कानून की वापसी को लेकर एक बहुत ही अहम बयान दिया है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा है कि उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के साथ चुनाव में उतरने के लिए तैयार नहीं है। ना ही उनकी पार्टी के नेता भारतीय जनता पार्टी का समर्थन देना चाहते हैं। शिरोमणि अकाली दल के नेताओं द्वारा इस तरह का बयान देने के बाद भारतीय जनता पार्टी पीछे जाति नजर आ रही है।

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देश के किसान कृषि कानून को नहीं मानते– सुखबीर सिंह बादल

शिरोमणि अकाली दल के नेता ने कहा है कि जब PM नरेंद्र मोदी संसद में इस कानून को पास करने की बात कर रहे थे। तभी उन्होंने कहा था कि भारत के किसान नए कानूनों को नहीं मानेंगे। भारतीय जनता पार्टी को समर्थन वाले सवाल पर सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि क्या भारतीय जनता पार्टी उन सब लोगों को वापस ला सकती है। जो नए कृषि कानून के कारण इस दुनिया को अलविदा कह गए। आपको बता दे कि दिल्ली की सीमाओं पर लगभग 700 किसान इस दुनिया को अलविदा कह गए हैं।