कौन होगा PM मोदी का विकल्प? लालू ने दिया जवाब…..

राजद(RJD) की स्थापना के 25 साल पूरे होने पर सिल्वर जुबली(Silver jubilee) समारोह का आयोजन किया था। अस्वस्थ होने के कारण राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव(Lalu Prasad Yadav) ने दिल्ली(Delhi) से ही वर्चुअल शुभारंभ किया और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। लालू प्रसाद यादव ने तमाम मुद्दों पर बात करते हुए कहा नेता कभी रिटायर नहीं होते है। साथ ही उन्होंने PM नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) का विकल्प, इसके बारे में भी बात की।

नेता कभी रिटायर नहीं होते- लालू प्रसाद यादव

समाचार पत्र दैनिक भास्कर(Dainik Bhashkar) को दिए इंटरव्यू में राजनीति के रिटायर होने के सवाल का जवाब देते हुए लालू प्रसाद यादव(Lalu Prasad Yadav) ने कहा कि नेता कभी रिटायर नहीं होते है। चुनाव में भाग लेना ही सिर्फ राजनीति नहीं है। समाज के उत्थान के लिए काम करते रहना भी राजनीति है। इस दौरान लालू अपने चित्त-परिचित अंदाज में नजर आए।

लालू ने RSS पर कसा तंज

पार्टी का मार्गदर्शक बनने के सवाल पर लालू यादव ने अपने चित-परिचित अंदाज में RSS पर तंज कसते हुए कहा कि उस पर तो हाफ पैंट वालों का कॉपीराइट(Copyright) है। आपको बता दें कि हाफ पैंट से उनका इशारा RSS पर था। क्योंकि पहले हाफ पैंट RSS का ड्रेस कोड था। हालांकि अब RSS ने फुल पैंट को भी शामिल कर लिया है।

2024 में मोदी के विकल्प पर लालू ने कहा

इंटरव्यू के दौरान लालू प्रसाद यादव ने 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) के विकल्प के बारे में कहा कि जो भी होगा वो तानाशाह, अहंकारी और आत्म मुग्ध नहीं होगा। इसके साथ ही लालू यादव ने कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल से साबित हो गया है कि व्यक्ति आधारित राजनीति लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। नरेंद्र मोदी का विकल्प उनकी जनता-वि रोधी नीति के समक्ष एक प्रगतिशील एजेंडा ही हो सकता है।

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नीतीश के साथ गठबंधन की कोई संभावना नहीं

मीडिया से बातचीत करते हुए लालू यादव ने भविष्य में नीतीश कुमार के साथ गठबंधन की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर देना। लालू ने 2015 में हुए विधानसभा चुनावों का हवाला देते हुए कहा सभी अंतर्वि’रोधों से परे हमने महागठबंधन को जीत दिलाई और राजद को ज्यादा सीट मिलने के बावजूद नीतीश कुमार(Nitish Kumar) को सीएम बनाया गया। दो साल के अंदर ही नीतीश ने जनादेश का अप मान किया। जिसको पूरे देश ने देखा। नीतीश कुमार रीढ़ की हड्डी, सिद्धांत और नीयत को खो चुके हैं। जिसका राजनीति में बहुत महत्व है।