7 साल के मासूम बच्चे को रखकर अंतिम संस्कार की चल रही थी तैयारी, माँ ने दी आवाज तो बच्चे की लौट आई सांस…

Amazing News: आपने फ़िल्मो(Films) में बहुत सुना हो गया कि कोई व्यक्ति मौ’त के मुंह से वापिस आ गया है। यह वाकई किसी फ़िल्म की किसी कहानी(Story of Film) सा ही प्रतीत होता है। कि कोई मौ’त के दरवाजे से वापिस लौट आया हो। ऐसा ही कुछ हरियाणा(Hariyana) के बहादुरगढ़(Bahadurgarh) में घटित हुआ है। यहां का एक परिवार अपने सात साल के बच्चे काे अस्पताल(Hospital) से मृत समझ घर ले आया था। जब घर पर उसके अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थीं। इसके बाद जो हुआ उसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे। साथ ही इस घटना की वजह से परिवार की खुशी वापस लौटा आयी। इस घटना के सामने आने से पूरे क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बनी हुई है। आइए आपको पूरा मामला विस्तार से समझाते हैं-

बहादुरगढ़ के किला मुहल्ला का था मामला

मौ’त को मात देने वाले इस लड़के ला मासूम परिवार बहादुरगढ़(Bahadurgarh) के किला मुहल्ला का रहने वाला है। आपको बता दे कि परिवार के मुखिया विजय कुमार शर्मा(Vijay kumar Sharma) बहादुरगढ़ के बाजार में राजू टेलर(Raju Tailour) के नाम से एक दुकान चलाते हैं। उनका बेटा हितेष शर्मा(Hitesh Sharma) भी इसी दुकान पर काम करता है। जिस लड़के की कहानी हम आपको बता रहे हैं वह हितेष के बेटे कुणाल की है। कुछ दिन पहले ही कुणाल को बुखार आ गया था। इसके बाद उसको डॉक्टर के पास ले गए, जहां से मिली दवाई से उसे आराम नहीं मिला। तबियत ज्यादा बिगड़ी तो उसके टेस्ट कराए गए। टेस्ट में पता चला उसे टाइ’फाइड है।

इसके बाद उसे दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में भ’र्ती कराया गया। लेकिन यहां पर भी उसकी हालत बिग’ड़ती चली गई। और अंत मे उसकी सांसे अस्पताल में लगभग थम चुकी थी। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि कुणाल को वेंटिलेटर पर रखना होगा लेकिन उसके बचने की कोई उम्मीद नहीं है यह खबर सुनते ही परिवार की आंखों में आंसू आ गए और भी बच्चे को मृ’त समझकर परिवार घर ले आया।

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इसके बाद जो हुआ वो हैरान करने वाला

विजय कुमार शर्मा बताते है कि ‘हम अस्पताल से घर लौटे ही थे। मेरे पास हितेष का फोन आया कि कुणाल की सांसे आधे घंटे की बची है। इसके बाद घर मे उथल पुथल मच गई। इसके बाद आधे घंटे बाद फोन पर हितेष ने कहा कुनाल नहीं रहा। परिवार की आंखों में आंसू आ गए, देर शाम का वक्त था। हमने बर्फ का इंतजाम करना शुरू किया, क्योंकि रात भर मृत देह को बिना बर्फ कैसे रखते। मुहल्ले के लोग आ गए। मेरे एक रिश्तेदार का फोन आया कि इस वक्त बहादुरगढ़ के राम बाग श्मशान घाट में बच्चे का अंतिम संस्कार हो सकेगा क्या। अगर घर के आसपास करना संभव नहीं है तो दिल्ली में ही अंतिम संस्कार करना होगा।

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दादी की वजह से कुणाल को मिली नई जिंदगी

बच्चे कुणाल के दादा विजय कुमार शर्मा बताते हैं, ‘कुनाल को दिल्ली में दफ’नाने पर विचार हो रहा था, मगर बच्चे की दादी यानी मेरी पत्नी आशा रानी ने कहा कि मुझे अपने पौते का मुंह देखना है। उसे तुम घर ले आओ। इसके बाद हम उसे एंबुलेंस से घर लेकर आ गए। जब एंबुलेंस से कुनाल को मेरे बड़े बेटे की पत्नी अन्नु शर्मा ने उठाया तो उसे कुछ धड़कन महसूस हुई।

उसके इतना कहते ही हमने बच्चे को फर्श पर लिटाया और उसको मुंह से सांस देना शुरू किया। मैंने और मेरे बेटे हितेष ने उसको खूब जोर-जोर से सांस दी। इसके बाद कुनाल के शरीर में हलचल शुरू हो गई। उसके दांत से हितेष का होंठ भी कट गया, खून भी निकलने लगा था लेकिन जैसे ही कुनाल के शरीर में हलचल हुई घर पर जमा लोगों ने भी जयकारे लगाने शुरू कर दिए। वहां मौजूद लोगों के आश्चर्य और खुशी का ठिकाना नहीं था।’ तो देखा आपने कैसे एक बच्चा मौ’त की दहलीज से वापिस आ गया।

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