अपनी शानदार जॉब छोड़ कर 4 दोस्तों बेचने लगे दूध, आज है मोटा टर्न ओवर

Best Young Dairy Award Osam Dairy: झारखंड में स्थित ऑसम डेयरी दिन-प्रतिदिन तरक्क़ी करने वाली कंपनियों में से एक है यह सिर्फ़ भारत देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी इस कंपनी ने प्रसिद्धि प्राप्त की है। (Osam Dairy) दुनियाभर में आज एक कंपनी ऐसा ब्रांड बन चुका है। जिसने बहुत कम वक़्त में ही काफ़ी बड़ा मुकाम प्राप्त किया है, लेकिन किसी ने शु ही कहा है “कोई भी सफलता बिना मेहनत के हासिल नहीं की जा सकती है”, ऑसम डेयरी कम्पनी की सफलता के पीछे भी कुछ ऐसे लोगों के आत्मविश्वास और परिश्रम की कहानी है, जो काफ़ी रोचक है। तो आइए आपको बताते है ऑसम डेयरी (Osam Dairy) के ‘कामयाबी के किस्से

अभिनव शाह (CA) 3 दोस्तों के साथ मिलकर ‘Osam Dairy’ नामक कंपनी की शुरूआत की।

इस मशहूर डेयरी फार्म के बिज़नेस को शुरू करने के पीछे मुख्य रूप से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के बेटे अभिनव शाह ने साथ दिया। अभिनव विदेश में रहकर एक मल्टीनेशनल कंपनी में एक सीए के तौर पर नौकरी किया करते थे उनके पास कंपनी चलाने का अनुभव था , लेकिन सीए की जॉब करके थक गए थे। रोजाना वही सुबह 9:00 बजे ऑफिस जाना वहाँ काम करना और शाम को 5:00 बजे घर लौट आना, इस तरह उन्हें अपना जीवन नीरस लगने लगा था। अब वह अपने जीवन मे कुछ अलग करना चाहते थे।

वह कुछ देर बैठकर सोचने लगे और फिर उनके दिमाग मे एक आईडिया आया उन्होंने इंटरप्रेन्योर की दुनिया में जाने का फ़ैसला कर लिया। जब उन्होंने अपना यह फ़ैसला उनके साथ काम करने वाले कुछ अन्य दोस्तों को बताया तो उनमें से कुछ दोस्तों ने उनके साथ पार्टनरशिप में काम करने की इच्छा जताई। फिर अभिनव ने अपने अन्य दोस्तो अभिषेक राज, हर्ष ठक्कर और राकेश शर्मा के साथ मिलकर साल 2012 में एक डेयरी फार्म बिजनेस शुरू किया और वर्ष 2014 में उन्होंने इस बिजनेस को Osam Dairy के नाम से पंजीकृत भी करवाया।

चारों दोस्तों ने डेयरी उद्योग के लिए छोड़ी MNC की शानदार नौकरी

Osam Dairy कंपनी के संस्थापक आभिनव शाह को ही माना जाता है, क्योंकि इस बिज़नेस को शुरू करने के पीछे अभिनव शाह का ही आईडिया था। वह पिछले 9 सालों से लक्सम्बर्ग की एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीए की पोस्ट पर काम कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने दूसरे देशों की डेयरी उद्योगों का काम भी देखा था, जिस कारण उन्हें यह कारोबार शुरू करने की प्रेरणा मिली थी।

जब उन्हें अपने बिजनेस के लिए पार्टनर भी मिल गए तो उनका हौसला और बढ़ गया। इस बिज़नेस के लिए न सिर्फ़ उन्होंने बल्कि उनके दोस्तों ने भी अपनी शानदार जॉब छोड़ी दी और वापस अपने देश भारत आ गए। वह सभी लोग जिन्होंने इस बिज़नेस के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी, उनका सालाना पैकेज करीब 40 लाख रुपये का था। फिर अपने देश आकर झारखंड में उन्होंने अपना यह डेरी फॉर्म कारोबार शुरू किया।

सभी पार्टनर्स ने किया 1-1 करोड़ रुपए का निवेश, करीब 40 गायों से की थी डेरी फार्म की शुरुआत।

सबसे पहले इस उद्योग की सारी संरचना को समझने और उसकी पूरी जानकारी हासिल करने के लिए अभिनव ने कानपुर से कमर्शियल डेयरी फार्मिंग का कोर्स किया। ट्रेनिंग के दौरान उनको जानवरों की स्वच्छता तथा स्वास्थ्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली जिससे उन्हें व्यापार की शुरुआत करने में नए नए आईडिया आने लगे। फिर इस कारोबार की स्थापना करने के लिए चार दोस्तों ने मिलकर 1-1 करोड़ रुपये का निवेश किया।

व्यापार की शुरुआत में कुल चार करोड़ रुपये का निवेश किया गया। सबसे पहले उन्होंने 1 एकड़ ज़मीन खरीदी और उसके बाद लगभग 30 लाख रुपये का निवेश डेयरी फार्म निर्माण में लगाया था। कार्यशाला में ट्रेनिंग प्राप्त करने के ठीक बाद वह पंजाब चले गए और वहाँ से लगभग 40 गायें खरीदी, जिसमें उन्होंने करीब 35 लाख रुपये का निवेश किया।

शुरुआत में सामने आई दिक्कतों का हल निकल , गायों का गोबर भी ख़ुद उठाया

बिज़नेस को शुरू करने पर पहले तो परेशानियाँ आती ही हैं। शुरुआत में आई मुसीबतों का अभिनव और उनके दोस्तों ने मिलकर सामना किया। उन्होंने जब यह डेरी प्लांट खोलने का फ़ैसला किया था तो उन्हें इसके लिए 20 करोड़ रुपयों की आवश्यकता थी। हालांकि उनके लिए यह एक बड़ी समस्या थी लेकिन कई दिनों की मशक्कत के बाद उन्हें नेशनल बैंक से 7 करोड़ रुपए का लोन प्राप्त हो गया।

बिजनेस शुरू किए अभी एक महीना भी नहीं बीता था कि उनकी 26 गायें संक्रमित होकर मर गई। उनके लिए यह बड़ा झटका था । उन्हें इस उद्योग का अनुभव भी नहीं था, इस कारण से उन सभी पार्टनर्स को गायों के मरने की वज़ह से काफ़ी नुक़सान सहना पड़ा। इतना ही नहीं, सभी सुख-सुविधाओं वाली मल्टीनेशनल कंपनी से आए इन युवाओं को गायों की लाशें भी ख़ुद ही उठानी पड़ी और कई दिनों तक गायों का गोबर भी उन्हें ख़ुद ही साफ़ करना पड़ा, पर मुश्किकों के आगे उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

उन सभी ने मिलकर यह फैसला किया कि वह इस फील्ड के विशेषज्ञों से और अधिक जानकारी लेकर काम करेंगे। फिर विशेषज्ञ से बात करके उन्होंने व्यापार के लिए 50 लाख रुपये में 100 होल्सटीन फ्रीजियन गायें ख़रीद लीं। जिसके लिए उन्हें और ज़्यादा पैसे लगाने पड़े। अब तक उनका निवेश प्रति साझेदार के हिसाब से करीब 1.5 करोड़ का हो गया था। हालांकि, इस कारोबार में इतने अधिक पैसे लगाना उन लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्हें उनकी मेहनत का फल मिला तथा ग्राहकों को उनका प्रोडक्ट पसंद आने की वज़ह से उसकी डिमांड बढ़ती गई। फिर तो 6 महीने के अंदर ही उन्हें मुनाफा भी होने लगा।

मुसीबतें सिर्फ यही नही खत्म हो गई थी उन्हें स्थानीय गुंडों का भी सामना करना पड़ा। इस डेयरी फार्म के कंस्ट्रक्शन के काम में करीब 1 साल लगा था और साल 2015 में Osam Dairy नाम से उन्होंने काम शुरू किया था। जैसे ही इनका कारोबार तरक्क़ी करने लगा तो वहाँ के स्थानीय गुंडों को यह बात रास नहीं आई और उन्हें परेशान करने के लिए गुंडों ने विरोध करना शुरू कर दिया। यह एक बहुत बड़ी चुनोती थी की गुंडों से छुटकारा कैसे पाया जाए।, क्योंकि इस क्षेत्र में उनका पहले से ही एकाधिकार जमा हुआ था, फिर उन्हें इस विकसित प्लांट से प्रतिस्पर्धा नहीं चाहिए थी। अभिनव और उनकी सारी टीम ने भी उन गुंडों का निडर होकर सामना किया, जिससे उन गुंडों को विरोध बंद करना पड़ा था।

आज ऑसम डेयरी का 90 करोड़ का है सालाना टर्नओवर है और आज 180 से ज्यादा वर्कर काम करते हैं

इस प्रकार से सभी परेशानियों को समझाते हुए उनका सफ़र आगे बढ़ता गया तथा वह इस कारोबार की बारीकियाँ भी सीखते चले गए। अब Osam Dairy एक सुप्रसिद्ध ब्रांड हो गया था तथा राज्य के हर एरिया में उनके कस्टमर्स को यह डेरी अपनी सर्विसेस दे रही है। अब वे अन्य राज्यों में भी अपने इस काम को फैलाने का सोच रहे हैं।

आज के समय में Osam Dairy में 180 वर्कर्स काम करते हैं और इसका पिछले वर्ष का टर्न-ओवर 90 करोड़ तक हो गया है। झारखंड में इस कम्पनी ने दो प्लांट बना रखे हैं, जिससे रोजाना करीब 2 लाख लीटर दूध प्राप्त होता है तथा वे 350 गाँवों से दूध इकठ्ठा करते हैं। वे होम डिलीवरी से लेकर होटलों और दुकानों तक भी दूध की सप्लाई कर रहे हैं।

‘Best Young Dairy Award’ से नवाज़ा गया

अब तो ऑसम डेयरी फार्म (Osam Dairy) तरक्क़ी की राह पर चल पड़ा है और अपना काम अन्य शहरों व राज्यों में भी शुरू कर रहा है। आपको बता दें कि Osam Dairy को वर्ष 2013 में झारखंड सरकार की ओर से ‘Best Young Dairy Award’ भी प्रदान किया गया था। इस फार्म के संस्थापक सभी को सन्देश देते हुए कहते हैं- “आगे बढ़ते रहो और अपने स्वाभाविकता के साथ चलो, शुरूआत में यात्रा कठिन लगेगी परन्तु अगर आप लगातार सफलता की दिशा में चलते रहे तो ख्याति ख़ुद ब ख़ुद आपके रास्ते में आ ही जाएगी।”

अभिनव और उनके साथियों का यह सफ़र अभी ख़त्म नहीं हुआ है। अपनी गुणवत्ता को और कंपनी की तरक्की को क़ायम रखते हुए वर्ष 2022 तक इस कंपनी ने 500 करोड़ का व्यापर करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस कहानी से मालूम पड़ता है कि सफलता का कोई शार्टकट नही है । सफलता पानी है तो मुश्किलों और मुसीबतों का सामना करना जरूरी है क्योंकि यही अनुभव व्यक्ति की सफलता की चाबी होती है ।