जानिए क्यों उमड़ा इस भिखारी की आखिरी यात्रा में जन सैलाब……

सोशल मीडिया(Social Media) पर चर्चा में बनी कर्नाटक में निकली एक अंतिम यात्रा है। आपको जानकर आ श्चर्य(Surprise) होगा कि यह आखिरी यात्रा एक भिखारी की थी। यात्रा में शामिल होने वाले लोग किसी लोभ से नही आये थे। और न किसी के ड र से। न किसी ने बुलाया था। ये सब उसक के लिए  प्रार्थना (Pray) करने के लिए खुद चले आए थे ये वो शख्श था जिसने हमेशा एक-एक रुपये मांग कर जीवन गुजार ।

बसवा की कैसे हुई मौ त

कुछ दिन पहले की ही बात है कर्नाटक(Karnataka)के बेल्लारी के पास 45 साल के मानसिक रूप से विक्षिप्त भिखारी। बसवा उर्फ हुचा बस्या की मौ त एक दुर्घटना(Accident) हो गई। 12 नवंबर को एक बस ने उसे टक्कर मारी थी। उसके बाद सरकारी अस्पताल (Hospital) में से भर्ती कराया गया। हालत गं भीर होने के कारण उसे बचाया नहीं जा सका। लोग आ श्चर्य कर रहे है कि एक भीख मांगने वाले की मौत में हजारों लोग कैसे जमा हो गए। उसके पार्थिव शरीर को एक झांकी के रूप ले जाया गया और साथ ही मुख्य सड़कों पर एक बैंड द्वारा संगीत बजाया गया।

एक रुपया लेकर लोगों को देता था लाखों करोड़ों दुआऐं

बसवा के भीख माँगने का एक अलग ही अंदाज़ था। वह एक रुपये भीख लेकर लोगों को लाखों करोड़ों दुआएँ देता था। मन जाता है कि लोग तरस जाते थे कि बसवा उनके दरवाजे( Door) पर भीख माँगने कब आएगा। बसवा को लोग गुडलक चार्म मानते थे वो जिस गली से भीख माँगने के लिए गुजर जाता था, वहाँ गुडलक शुरू हो जाता था। बसवा पर लोगों का अटूट विश्वास(Belief) होने की वजह से उसके आखिरी यात्रा  में लाखों लोगों की भीड़ थी। चाहे महँगाई कितनी भी बढ़ती गई लेकिन बसवा ने एक रुपए से अधिक किसी से नहीं माँगा।

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 राजनीतिक से भी जुड़े थे बसवा

वह पूर्व उपमुख्यमंत्री (Deputy Chief Minister) दिवंगत(Divangat) और सांसद प्रकाश और पूर्व मंत्री परमेश्वर नाइक को जानता था। उसने कई बार बिना किसी झि झक के राजनेताओं से बात की। सोशल मीडिया(Social Media) पर कई लोगों ने उसे याद करते हुए लिखा कि कैसे ‘हुचा बस्या’ लोगों को ‘अप्पाजी (पिता)’ कह कर सं बोधित करता था। बसवा के आखिरी यात्रा की तस्वीरें और वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर चलरही हैं।