PM मोदी और अमित शाह ने 44 साल बाद इंदिरा गांधी के इस आदेश को पलटकर रच दिया इतिहास….

भारतीय लोकतंत्र(Indian Democracy) के इतिहास में 25 जून का दिन बेहद अहम है और हमेशा याद रखा जायेगा। 25 जून के दिन ही भारत में आपातकाल(Emergency) लगाया गया था। आपातकाल लगने के बाद भारत में एक के बाद एक राजनीतिक घटनाओं ने जन्म लिया। 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक की 21 महीने की अवधि में भारत में आपातकाल था। आपातकाल के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी(Indira Gandhi) ने एक ऐसा फैसला लिया। जो आपातकाल खत्म होने के बाद भी भारत के एक राज्य में पिछले 44 साल से लागू था। PM मोदी और अमित शाह के साहसी नेतृत्व ने इस फैसले को हटाया। चलिये आपको बताते है कि क्या था वह फैसला।

आपातकाल के 44 वर्षों बाद भी लागू रहा इंदिरा का वो फैसला

आपातकाल के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संविधान में 42 वां संशोधन(42nd Amendment) करके संसद(Parliament) और विधानसभा का कार्यकाल 6 साल का कर दिया था। आपातकाल(Emergency) के समाप्त होते ही मोरारजी देसाई(Morarji Desai) की सरकार ने आपातकाल के दौरान लिए गए सभी असंवैधानिक फैसलों को रद्द कर दिया। मगर आपको जानकर हैरानी होगी कि इंदिरा गांधी(Indira Gandhi) का यह फैसला 2019 तक जिस राज्य में लागू रहा, वो था जम्मू-कश्मीर(Jammu Kashmir)। जी हां इंदिरा गांधी ने जम्मू कश्मीर में विधानसभा का कार्यकाल छह साल का किया था, जबकि अन्य राज्यों में कार्यकाल पांच साल का होता है।

अनुच्छेद 370 को हटाने के साथ 2019 में खत्म हुआ इंदिरा का फैसला

जम्मू-कश्मीर में 1975 से विधानसभा का कार्यकाल छह साल का चला आ रहा था लेकिन 5 अगस्त 2019 को जब जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला तब से यहां भी विधानसभा का कार्यकाल देश के बाकी राज्यों की तरह पांच साल का हो गया है। साल 2019 में PM मोदी और अमित शाह के एक अहम फैसले से आपातकाल से चली आ रही परंपरा का आखिरकार अंत हुआ।

Also Read:- खुशखबरी: मोदी सरकार इस माह देगी मुफ्त LPG रसोई गैस कनेक्शन, आप भी इस तरह उठाएं लाभ….

1996 में पैंथर्स पार्टी ने भी की थी कोशिश

1996 में पैंथर्स पार्टी(Jammu and Kashmir National Panthers Party) के हर्षदेव सिंह(Harsh Dev Singh) ने विधानसभा के कार्यकाल को 5 साल करने के लिए प्रयास किया था मगर वह इसमें विफल रहे। विपक्ष की आलोचना और अंतर्राष्ट्रीय दवाव के बीच 5 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस बड़े निर्णय को लिया। इस फैसले के साथ ही आपातकाल के 44 वर्षों के बाद इंदिरा के लिए गए इस फैसले का अंत हुआ।