अलीगढ़: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में होली मिलन समारोह को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उन्हें होली मिलन समारोह आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है, जिससे असंतोष बढ़ गया है। वहीं, इस मामले पर अलीगढ़ से सांसद सतीश गौतम का बयान आग में घी डालने जैसा साबित हुआ है। उन्होंने कहा है कि होली हर हाल में मनाई जाएगी और जो भी मारपीट करेगा, उसे “ऊपर पहुंचा देंगे”।
होली मिलन समारोह की परमिशन क्यों नहीं?
छात्रों के अनुसार, 25 फरवरी को एएमयू के वाइस चांसलर को एक पत्र लिखकर 9 मार्च को होली मिलन समारोह की अनुमति मांगी गई थी। लेकिन प्रशासन ने मीटिंग के बाद इसकी इजाजत देने से इनकार कर दिया। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में अन्य धर्मों के धार्मिक आयोजनों को अनुमति दी जाती है, फिर होली पर रोक क्यों लगाई जा रही है? छात्रों ने यह भी कहा कि वे इस मामले से संबंधित ऑडियो-वीडियो सबूत सोशल मीडिया पर जारी करने की तैयारी में हैं।
सांसद का बड़ा बयान
अलीगढ़ के सांसद सतीश गौतम ने छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि हिंदू छात्र होली जरूर मनाएंगे और अगर कोई उन्हें रोकने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, “परमिशन की जरूरत ही नहीं है। जो मारपीट करेगा, उसे ऊपर पहुंचा देंगे।” उनके इस बयान ने विवाद को और तूल दे दिया है।
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“सभी हिंदू छात्र AMU में होली मनाएंगे। किसी भी छात्र को समस्या हो, उसके लिए हम बैठे हैं।
जो भी मारपीट करेगा.. उसे ऊपर पहुंचा देंगे”
– सतीश गौतम, अलीगढ़ से BJP सांसद pic.twitter.com/v0NREsQh2k
— Govind Pratap Singh | GPS (@govindprataps12) March 7, 2025
करणी सेना भी कूदी विवाद में
अखिल भारतीय करणी सेना के पदाधिकारियों ने भी इस मुद्दे पर विरोध जताया। गुरुवार को उन्होंने पैदल मार्च निकालकर कलेक्ट्रेट में एडीएम सिटी को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। करणी सेना के नेताओं ने घोषणा की कि 10 मार्च को हिंदू छात्रों के साथ एएमयू परिसर में होली खेली जाएगी, चाहे इसके लिए अनुमति मिले या नहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एएमयू में रोजा इफ्तार और ईद मिलन समारोह हो सकते हैं, तो फिर होली पर प्रतिबंध क्यों?
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विवाद का बढ़ता असर
यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन अभी तक अपने निर्णय पर कायम है, लेकिन छात्र और हिंदू संगठनों का विरोध जारी है। सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से ट्रेंड कर रहा है और लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि 9 और 10 मार्च को एएमयू में क्या स्थिति बनती है। क्या प्रशासन अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगा, या फिर यह विवाद और अधिक भड़क सकता है?